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03.सुरह इमरान

  अलिफ़ - लाम - मीम (1 ) अल्लाह के नाम से जो बहुत मैहरबान , रहम करने वाला है , उस के सिवा कोई माबूद नहीं , हमेशा जिन्दा ( सब का ) संभालने वाला। ( 2) उस ने आप ( स ) पर किताब उतारी हक के साथ जो उस से पहली ( किताब ) की तसदीक करती है , और उस ने तौरेत और इनजील उतारी ( 3) उस से पहले लोगों की हिदायत के लिए , और उस ने फूरकान ( हक को बातिल से जुदा करने वाला ) उतारा , बेशक जिन्होंने अल्लाह की आयतों से इनकार किया उन के लिए सख्त अज़ाब है , और अल्लाह जबरदस्त है , बदला लेने वाला। ( 4) बेशक अल्लाह पर छुपी हुई नहीं कोई चीज़ ज़मीन में और न आस्मान में ,(5) वही तो है जो तुम्हारी सूरत बनाता है माँ के रहम में जैसे वह चाहे , उस के सिवा कोई माबूद नहीं , जबरदस्त हिकमत वाला। ( 6) वही तो है जिस ने आप ( स)पर किताब नाजिल की , उस में मुहक्कम ( पुरूता)आयतें हैं वह किताब की असूल हैं , और दूसरी मुताशाबेह ( कई मअने देने वाली ) , सो वह उस से मुताशाबिहात की पैरवी करते हैं , फसाद ( गुमराही)की ग़र्ज़ से और उस का ( ग़लत)मतलब ढून्डने की ग़र्ज से , और उस का मतलब अल्लाह के सिवा कोई नहीं जानता , और म...

02.सुरह बकर

  " अलिफ-लाम-मीम( 1) यह किताब है इस में कोई शक नहीं , परहेज़गारों के लिए हिदायत ,(2) जो गैब पर ईमान लाते हैं , और काइम करते हैं नमाज़ और जो कुछ हम ने उन्हें दिया उस में से खर्च करते हैं ,(3) और जो लोग उस पर ईमान रखते हैं जो आप (स)पर नाजिल किया गया और जो आप (स)से पहले नाजिल किया गया और वह आखिरत पर यकीन रखते हैं।( 4) वही लोग अपने रब की तरफ से हिदायत पर हैं , और वही लोग कामयाब हैं।( 5) बेशक जिन लोगों ने कुफ्र किया , उन पर बराबर है आप(स)उन्हें डराएं या न डराएं वह ईमान नहीं लाएंगे।( 6) अल्लाह ने उन के दिलों पर और उन के कानों पर मुहर लगा दी।और उन की आँखों पर पर्दा है। और उन के लिए बड़ा अज़ाब है।( 7) और कुछ लोग हैं जो कहते हैं हम ईमान लाए अल्लाह पर और आखिरत के दिन पर और वह ईमान वाले नहीं।( 8) वह धोका देते हैं अल्लाह को और ईमान वालों को , हालांकि वह नहीं धोका देते मगर अपने आप को , और वह नहीं समझते।( 9) उन के दिलों में बीमारी है , सो अल्लाह ने उन की बीमारी बढ़ा दी , और उन के लिए दर्दनाक अज़ाब है | क्योंकि वह झूट बोलते हैं।( 10)"   " और जब उन्हें कहा जाता है कि ज़मीन मैं फसा...