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Showing posts from May, 2022

03.सुरह इमरान

  अलिफ़ - लाम - मीम (1 ) अल्लाह के नाम से जो बहुत मैहरबान , रहम करने वाला है , उस के सिवा कोई माबूद नहीं , हमेशा जिन्दा ( सब का ) संभालने वाला। ( 2) उस ने आप ( स ) पर किताब उतारी हक के साथ जो उस से पहली ( किताब ) की तसदीक करती है , और उस ने तौरेत और इनजील उतारी ( 3) उस से पहले लोगों की हिदायत के लिए , और उस ने फूरकान ( हक को बातिल से जुदा करने वाला ) उतारा , बेशक जिन्होंने अल्लाह की आयतों से इनकार किया उन के लिए सख्त अज़ाब है , और अल्लाह जबरदस्त है , बदला लेने वाला। ( 4) बेशक अल्लाह पर छुपी हुई नहीं कोई चीज़ ज़मीन में और न आस्मान में ,(5) वही तो है जो तुम्हारी सूरत बनाता है माँ के रहम में जैसे वह चाहे , उस के सिवा कोई माबूद नहीं , जबरदस्त हिकमत वाला। ( 6) वही तो है जिस ने आप ( स)पर किताब नाजिल की , उस में मुहक्कम ( पुरूता)आयतें हैं वह किताब की असूल हैं , और दूसरी मुताशाबेह ( कई मअने देने वाली ) , सो वह उस से मुताशाबिहात की पैरवी करते हैं , फसाद ( गुमराही)की ग़र्ज़ से और उस का ( ग़लत)मतलब ढून्डने की ग़र्ज से , और उस का मतलब अल्लाह के सिवा कोई नहीं जानता , और म...